कविता :डॉ.अपर्णा : कर्म की ज्योति
अपर्णा : कर्म की ज्योत (विनोद आनंद ) वह नहीं एक साधारण नारी, वह ज्वाला का अवसान नहीं, वह ज्ञान-धार, वह करुणा है, वह केवल रूप विधान नहीं। गोविंदपुर की…
अपर्णा: एक अमिट स्मृति’ — कवि शिरीष सुमन के उद्गार
कवि डॉ शिरीष सुमन की कलम से नभ के नीले विस्तारों में, जब ढलती संध्या आती है, तब तेरी स्मृतियों की छाया, उर में दीप जलाती है। हे अपर्णा! तू…
आज 5 जुलाई स्व. डॉ.अपर्णा राय की पुण्यतिथि पर विशेष : माँ: स्मृति के गलियारों में गूँजती एक अमर गूंज
मां की पुण्य तिथि पर बेटी की एक भावनात्मक उदगार माँ, आज जब मैं चारों ओर देखती हूँ, तो गर्व से मेरा सिर झुक जाता है। तुमने जो बीज बोया…
डॉ. अपर्णा राय: करुणा की ज्योति, ज्ञान की धारा और सेवा का अमर संकल्प
डॉ. अपर्णा राय का व्यक्तित्व भावुकता और प्रशासनिक दक्षता का दुर्लभ मेल था। वे मानती थीं कि एक सच्चा इंसान होना सबसे बड़ी उपलब्धि है। पर-पीड़ा को दूर करना, दूसरों…
शिवोहम पब्लिकेशन हाउस: नवोदित लेखकों के सपनों को पंख देता एक साहित्यिक मंच
सा हित्य किसी भी सभ्य समाज का प्राण होता है, जो न केवल शब्दों का एक संग्रह मात्र है, बल्कि यह हमारे समाज, संस्कृति, संवेदनाओं और विचारों का एक जीवंत…
“मौन की गूँज” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के विविध पक्षों का संवेदनशील चित्रण है
पुस्तक समीक्षा –मौन की गूँज पुस्तक : मौन की गूँज लेखिका : सुप्रिया कुमारी ‘सरस’ प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन, कोलकाता / हैदराबाद ईमेल : shivohamphouse@outlook.com सा हित्य मानव मन की…
अंतर्मन से अनंत तक: भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की एक अनूठी यात्रा
पुस्तक : “चालीसा संग्रह : अंतर्मन से अनंत तक” लेखिका : शिवलाल दाँगी प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन, कोलकाता / हैदराबाद ईमेल : shivohamphouse@outlook.com अन्य पुस्तकें–1 काव्य संग्रह ‘समर्पण’ 2 चालीसा…
संस्मरण : इंसानियत आज भी ज़िंदा है
यदि भारत की संस्कृति को समझना हो, तो ट्रेन में सफर करके देखिए। वहाँ विभिन्न प्रकार के लोगों से मुलाकात होती है। सबके विचार अलग-अलग होते हैं। कभी विचार मिल…
बुद्ध-कबीर की वैचारिक विरासत: इंजीनियर भोगेन्द्र मंडल का जीवन-दर्शन
इंजीनियर भोगेन्द्र मंडल जी का जन्म मधुबनी जिले के हरलाखी गांव में एक साधारण व्यवसायी-कृषक परिवार में हुआ। पिता स्वर्गीय सुखदेव मंडल की छत्रछाया में पले-बढ़े। लेकिन यह परिवार साधारण…
कविता : बिटिया
बिटिया “बधाई हो बधाई” दूर से आवाज आई। स्नेहिल आवाज, चेहरे पर खुशी लिए विमला ताई आई। माँ ने नज़रें झुका लीं, पिता के चेहरे पर थोड़ी फीकी मुस्कान आई।…