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साहित्य, संस्कृति, कला

राजेश्वरी बाजपेई की तीन कविताएं

सर्दियों का ठहाका *************** हाय सर्दी की यह ठंड या प्रकृति का है सभी को दंड? हंसी-खुशी प्यार से सब इसे कहते “गुलाबी ठंड” थोड़ी रहम का बने यदि मापदंड…

भोजपुरी के सांस्कृतिक पुरोधा: भिखारी ठाकुर का जीवन दर्शन और रचना संसार

भिखारी ठाकुर का जीवन दर्शन कला को मनोरंजन से ऊपर उठाकर ‘लोक-चेतना’ और ‘समाज सुधार’ के एक शक्तिशाली औजार के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़कर…

स्मृतियों में अमिताभ दा:”सृजन के सिपाही: अमिताभ दा की स्मृति और गोविन्दपुर की सांस्कृतिक यात्रा”

(विनोद आनंद) अ मिताभ दा, जिनका आज दिवंगत हो जाना न केवल मुझे बल्कि समस्त गोविन्दपुर को खलता है, आज होते तो 70 वर्ष के होते। उनकी अनुपस्थिति, मात्र एक…

विषकन्या का प्रेम

विनोद आनंद का प्रथम लघु उपन्यास ‘विषकन्या का प्रेम’ शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। यह कृति एक अनूठी पहल है, जिसमें प्राचीन काल में गुप्तचर के रूप में इस्तेमाल…

विनोद आनंद की कहानी:- 4- धोखे का सुखद अंत

जीवन परिचय : कहानीकार :-विनोद आनंद शिक्षा :एम.ए. (हिंदी )रांची वि. वि. साहित्य के विभिन्न विधाओं में लेखन सम्मान :-विभिन्न संस्थाओं से साहित्य औऱ पत्रकारिता के लिए सम्मानित संप्रति :-सम्पादक…

विनोद आनंद क़ी कहानी : कमली : एक अधूरी विदाई

जीवन परिचय :कहानीकार :-विनोद आनंद शिक्षा :एम.ए. (हिंदी )रांची वि. वि. साहित्य के विभिन्न विधाओं में लेखन सम्मान :-विभिन्न संस्थाओं से साहित्य औऱ पत्रकारिता के लिए सम्मानित संप्रति :-सम्पादक अंतर्कथा,…

संस्मरण : मिट्टी से दूर, आत्मा के पास

गांव की संस्कृति से दूर, शहर की भीड़ में खो जाने की पीड़ा – यह सिर्फ मेरी नहीं, लाखों युवाओं की व्यथा है। सोचता हूं – क्या किसी दिन ऐसा…

विनोद आनंद की कहानी :- विक्टोरिया पार्क की वह बेंच

लेखक परिचय :- विनोद आनंद (विनोद कुमार मंडल) जन्म 10 जनवरी, 1965 शिक्षा:-स्नातकोत्तर(हिंदी), रांची विश्व विद्यालय, पिछले चार दशक से साहित्य औऱ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय, साहित्य के विभिन्न…

स्मृतियों में बसा ‘डाक चाचा’:खाकी वर्दी वाला देवदूत

“डाकिया” शब्द कानों में पड़ते ही, आज से कुछ वर्ष पहले का वह शांत, किंतु जीवंत दृश्य मानस पटल पर साकार हो उठता है। आँखों के समक्ष खाकी का वह…

कविता :-मिट्टी का घरौंदा

दीपावली पर विशेष मिट्टी का घरौंदा कवयित्री :- नुसरत प्रवीण बहुत याद आता है , वह मिट्टी का घरौंदा , वह बचपन की दिवाली , पटाखे ,फुलझड़ियां व वेली का…