पुस्तक समीक्षा – “शृङ्गार रस” : प्रेम, सौंदर्य और संवेदनाओं का काव्यात्मक उत्कर्ष
पुस्तक : शृङ्गार रस साझा काव्य संकलन सम्पादक : ऋषभ विश्वकर्मा प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन शिवोहम प्रकाशन की इस कृति की एक रसात्मक साहित्यिक मीमांसा भा रतीय काव्य परंपरा में…
पुस्तक समीक्षा-लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर: कर्तव्य, करुणा और न्याय का महाकाव्य
पुस्तक :पुण्यश्लोक :अहिल्यादेवी होलकर साझा संकलन सम्पादक :- विजय पाटिल प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन शिवोहम प्रकाशन की साझा संकलन कृति की एक साहित्यिक मीमांसा भा रतीय इतिहास के फलक पर…
नहीं रही रमणिका गुप्ता, वे साहित्य, संघर्ष और संवेदना की अनन्य साधिका थी, धनबाद से था उनका गहरा नाता
हिंदी साहित्य और जन आंदोलनों की प्रखर आवाज रमणिका गुप्ता का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया, दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली.इसके साथ हीं…
हल से कलम तक: जगदीश प्रसाद मण्डल की सृजन यात्रा
मैथिली साहित्य के आधुनिक इतिहास में जगदीश प्रसाद मण्डल एक ऐसे विरल रचनाकार के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने साहित्य के अभिजात्य दुर्ग को ढहाकर उसे सीधे खेत-खलिहानों और आम…
विनोद आनंद की कहानी : – बिन ब्याही माँ (5)
लेखक परिचय:- विनोद आनंद उर्फ़ विनोद कुमार मंडल पिछले चार दशक से पत्रकारिता एवं साहित्यिक लेखन से जुड़े हैं, इनकी कहानियाँ, संस्मरण औऱ साहित्य के विभिन्न विधाओं में लिखी गयी…
प्रतीक्षा गाँगुली नाथ साहित्य लेखन और एक विराट सृजनात्मक आंदोलन का जीवंत प्रतीक
प्रतीक्षा गाँगुली नाथ ने ‘शब्द-साधना’ को एक जीवंत आंदोलन का रूप दिया है। उनकी रचनाओं में जीवन के विविध रंग, सामाजिक विसंगतियाँ और मानवीय संवेदनाओं का गहरा पुट मिलता है।…
संपादकीय: सत्ता की हवस और अमेरिकी दादागिरी की वेदी पर बलि चढ़ती वैश्विक शांति
पश्चिम एशिया में गहराता ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय सीमा विवाद नहीं, बल्कि एक वैश्विक त्रासदी का रूप ले चुका है। अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय मर्यादाओं को ताक पर रखकर की…
शहीद रामफल मंडल पर केंद्रित विनोद आनंद की कविताएं
कवि परिचय :- विनोद आनंद ( विनोद कुमार मंडल ) शिक्षा :- एम ए (हिंदी )रांची विश्व विद्यालय, रांची पिछले चार दशक से पत्रकारिता, औऱ साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय,…
राजेश्वरी बाजपेई की तीन कविताएं
सर्दियों का ठहाका *************** हाय सर्दी की यह ठंड या प्रकृति का है सभी को दंड? हंसी-खुशी प्यार से सब इसे कहते “गुलाबी ठंड” थोड़ी रहम का बने यदि मापदंड…
भोजपुरी के सांस्कृतिक पुरोधा: भिखारी ठाकुर का जीवन दर्शन और रचना संसार
भिखारी ठाकुर का जीवन दर्शन कला को मनोरंजन से ऊपर उठाकर ‘लोक-चेतना’ और ‘समाज सुधार’ के एक शक्तिशाली औजार के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़कर…