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साहित्य, संस्कृति, कला

संस्मरण : इंसानियत आज भी ज़िंदा है

यदि भारत की संस्कृति को समझना हो, तो ट्रेन में सफर करके देखिए। वहाँ विभिन्न प्रकार के लोगों से मुलाकात होती है। सबके विचार अलग-अलग होते हैं। कभी विचार मिल…

बुद्ध-कबीर की वैचारिक विरासत: इंजीनियर भोगेन्द्र मंडल का जीवन-दर्शन

इंजीनियर भोगेन्द्र मंडल जी का जन्म मधुबनी जिले के हरलाखी गांव में एक साधारण व्यवसायी-कृषक परिवार में हुआ। पिता स्वर्गीय सुखदेव मंडल की छत्रछाया में पले-बढ़े। लेकिन यह परिवार साधारण…

कविता : बिटिया

बिटिया “बधाई हो बधाई” दूर से आवाज आई। स्नेहिल आवाज, चेहरे पर खुशी लिए विमला ताई आई। माँ ने नज़रें झुका लीं, पिता के चेहरे पर थोड़ी फीकी मुस्कान आई।…

बदलते परिवेश में संबंध, अपेक्षाएँ और स्त्री की भूमिका

“परिवर्तन ही जीवन का शाश्वत नियम है; जो केवल अतीत या वर्तमान में उलझे रहते हैं, वे निश्चित ही अपने भविष्य को खो देते हैं।” बदलते परिवेश में संबंध, अपेक्षाएँ…

मिथकीय पुनर्पाठ और स्त्री-चेतना का नया आकाश: ‘विषकन्या का प्रेम’ एवं ‘शकुंतला की मातृ-चेतना’ का आलोचनात्मक मूल्यांकन

उपन्यास का सबसे सशक्त, कलात्मक और प्रभावशाली पक्ष इसकी भाषा-शैली और इसकी गहन प्रतीक योजना में निहित है। लेखक विनोद आनंद की लेखनी में काव्यात्मकता के सुकोमल सौंदर्य और दार्शनिकता…

लोक नाट्य से शोध की गहराई तक: डॉ. चन्द्रसखी का सांस्कृतिक अवदान

डॉ. बीरेन्द्र कुमार ‘चन्द्रसखी’ मैनपुरी की माटी और धानुक समाज के गौरव हैं। किसान परिवार से पी-एच.डी. तक का उनका संघर्ष प्रेरणादायी है। उन्होंने काव्य और शोध के माध्यम से…

विष्कन्या का प्रेम : विष से विदेह तक: विनोद आनंद के उपन्यासों में मिथक, संवेदना और नवीन दृष्टि का अनुशीलन

विनोद आनंद की साहित्यिक प्रतिभा की सराहना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि उन्होंने पत्रकारिता की वस्तुनिष्ठता और साहित्य की भावुकता का एक दुर्लभ संतुलन साधा है। वे न केवल एक…

पुस्तक समीक्षा – “नव कलश” : नवचेतना, आस्था और जीवन मूल्यों का पावन संकलन, मूल्यों का पावन संकलन

पुस्तक : नव कलश लेखिका : ज्योति कुमारी प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन शिवोहम प्रकाशन की इस कृति की एक साहित्यिक मीमांसा भारतीय संस्कृति में “कलश” केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि…

पुस्तक समीक्षा – “वो नदी का किनारा” : स्मृतियों, संवेदनाओं और जीवन प्रवाह का काव्यात्मक प्रतिबिंब

पुस्तक : वो नदी का किनारा लेखक : अनिश राय प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन शिवोहम प्रकाशन की इस कृति की एक भावपूर्ण साहित्यिक मीमांसा नदी केवल जल का प्रवाह नहीं…

साहित्य विमर्श धनबाद द्वारा आयोजित भव्य काव्य गोष्ठी में कवियों ने बिखेरा अपनी रचनाओं का जादू

पुष्प पैलेस के सभागार में ‘साहित्य विमर्श’ के तत्वावधान में आयोजित ‘साहित्यिक गोष्ठी सह कवि सम्मेलन’ ने शब्दों की जादूगरी से एक अमिट छाप छोड़ी। माँ शारदे की वंदना और…