ज़हर की थाली और व्यवस्था की लाचारी: हमारी सेहत पर मंडराता खतरा और जनप्रतिनिधियों की आपराधिक चुप्पी
हाल ही में ग्रेटर नोएडा से एक ऐसी ही दहला देने वाली खबर सामने आई, जहां नूडल्स खाने से एक ही परिवार के पांच सदस्यों—माता-पिता और तीन मासूम बच्चों—की दर्दनाक…
कहानी- अंतर्दृष्टि
विनोद आनंद विवसता मनुष्य को बुरा काम करने के लिए विवश कर देती है। लेकिन जब कोई एक बार बुरे कामों के चक्रव्यूह में उलझ जाता है, तो व्यवस्था उसे…
जगपतिया की पीड़ा और रामफल मंडल की शहादत: विनोद आनंद के उपन्यास ‘बाजपट्टी संग्राम के नायक: रामफल मंडल’ का मार्मिक केंद्र
विनोद आनंद का उपन्यास ‘बाजपट्टी संग्राम के नायक: रामफल मंडल’ सीतामढ़ी (बिहार) के स्वतंत्रता सेनानी रामफल मंडल के त्याग और ब्रिटिश दमन की ऐतिहासिक कथा प्रस्तुत करता है। इस आख्यान…
विनोद आनंद द्वारा लिखित ‘बाजपट्टी संग्राम के नायक: सिर्फ रामफल मंडल’ ही नहीं बल्कि 1942 के विस्मृत शहीदों का है इतिहास
समीक्षक :-सिनोद कुमार मंडल .नेत्र चिकित्सक,केवटी, दरभंगा समीक्षक का आत्म कथ्य -साहित्य अध्ययन मे रुचि औऱ उसके विश्लेषण करने का प्रयास रहता है, बाजपट्टी संग्राम के नायक:रामफल मंडल को पढ़…
इतिहास के पन्नों से बाहर आते गुमनाम नायक: राजेंद्र भवन में विनोद आनंद की कृतियों का ऐतिहासिक विमोचन
शहीद रामफल मंडल के शहादत दिवस के अवसर पर विनोद आनंद की इन दोनों पुस्तकों का विमोचन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि राष्ट्र अपने सच्चे नायकों को कभी…
राखी का धागा और लोकतंत्र का सवाल
राखी का धागा केवल भाई-बहन के रिश्ते को नहीं जोड़ता, बल्कि हमें हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास भी कराता है। जब यही भावना पूरे समाज में फैलती है, तो एक…
जब सबने कहा-‘आपसे नहीं होगा’…?
एक शिक्षक थे। नया स्कूल था, नई जिम्मेदारी थी और बहुत-सी उम्मीदें भी। वह रोज़ समय से पहले स्कूल पहुँचते। कक्षा में बच्चों के चेहरे देखते और सोचते- “इनमें से…
कविता :डॉ.अपर्णा : कर्म की ज्योति
अपर्णा : कर्म की ज्योत (विनोद आनंद ) वह नहीं एक साधारण नारी, वह ज्वाला का अवसान नहीं, वह ज्ञान-धार, वह करुणा है, वह केवल रूप विधान नहीं। गोविंदपुर की…
अपर्णा: एक अमिट स्मृति’ — कवि शिरीष सुमन के उद्गार
कवि डॉ शिरीष सुमन की कलम से नभ के नीले विस्तारों में, जब ढलती संध्या आती है, तब तेरी स्मृतियों की छाया, उर में दीप जलाती है। हे अपर्णा! तू…
आज 5 जुलाई स्व. डॉ.अपर्णा राय की पुण्यतिथि पर विशेष : माँ: स्मृति के गलियारों में गूँजती एक अमर गूंज
मां की पुण्य तिथि पर बेटी की एक भावनात्मक उदगार माँ, आज जब मैं चारों ओर देखती हूँ, तो गर्व से मेरा सिर झुक जाता है। तुमने जो बीज बोया…