• Wed. Feb 4th, 2026
साहित्य, संस्कृति, कला

राजीव कुमार झा की कविताएं

Byadmin

Jul 29, 2022
Please share this post

संक्षिप्त कवि परिचय

राजीव कुमार झा

जन्मदिन : 8 जुलाई 1971
शिक्षा: एम . ए .
( जनसंचार और हिंदी)
कविता के अलावा पुस्तक समीक्षा साक्षात्कार प्रस्तुति से
लगाव !
पत्र पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन
कविता संग्रह शीघ्र प्रकाश्य !

मोबाइल नं . 6206756085

इमेल
rajeevkumarjha294@gmail.com

वर्तमान पता
इंदुपुर
पोस्ट – बड़हिया
जिला – लखीसराय
बिहार
811302

 

राजीव कुमार झा की कविताएं

 

मधु श्रावणी

सुबह का सूरज
सारी दिशाओं में
रोशनी लेकर
सबके घर के बाहर
चला आया,
अंधेरा मिट गया
आशा का भाव
अरी सुंदरी
रात के सपनों में
समाया
अब नदी की धारा
बहती
दिखाई दे रही
तुम्हारी मुस्कान
पूरब की लालिमा में
छिटक रही
जीवन की झील में
मन की नाव
डगमग चल पड़ी
उस पार जाना है
शाम में घर
लौट आना है
सितारों की
झिलमिलाहट से
आकाश का आंगन
सजा है,
हवा गीत गाती
सुबह सबको
बाहर बुलाती
गहन वन के
बीच
किसी राह पर
आगे बढ़ाती
झंझावात में
बारिश ठहर गयी
सुबह में कलियां
महक रही
आशा की किरण
आंगन में छायी
धरती के
कण – कण में
आलोक बिखरा है
सभी दिशाओं में
अरी किरण !
तुम्हारा रूप लावण्य
निखरा है!
यह प्रेम की माला
यौवन का उजाला
बारिश में आकाश
मेघों से भरा
सूनी सपाट
धरती पर
उमगता जंगल
हराभरा !

___________//___________

प्रेम की गली

चांद ने रात को
रोशनी से नहलाया।

उसके पहले
सितारों को देखकर
आधी रात में
उसे हंसी आया ।

 

बातें करते
वे पास सिमट
आये,
हवा जंगल में
गीत गाती आयी।
खामोश खड़ी
देती दिखाई!

अरी प्रिया!
सपनों की गली में
तीज त्यौहार के
मनभावन गीत
गूंजते देते सुनाई,
बारिश के बाद
तीखी धूप
निकल आयी।

धान के
खेतों में सुबह
बदली छाई !
पानी से भरे
नदी , झील
ताल और तलाई
बादल की तरह
धरती पर
सब एक दूसरे की
रोज करें भलाई।

( 2 )

बधाई !

शाम में याद आती
बाबा तुलसीदास की
चौपाई
हनुमान ने लंका में
जब आग लगाई
यह सब सुनकर
अशोक वाटिका में
सीता जी को
खूब हंसी आयी
रामचन्द्र जी के लिए
मुद्रिका देकर
उन्होंने
समुद्र पार करने की
खबर भिजवाई
इस सावन में
विभीषण को
सबसे पहले
हमारी बधाई!

___________ //____________

उदासी

 

उस दिन
तब हम
मन की बातें
तुम्हारी तरह
सबको कह पाते
खुद को भी
शायद
कोई बात
अब नहीं बताते
काश ! उसी से
अपना दिल लगाते
किसी को
इसके बारे में
कुछ भी नहीं
बताते
तुम्हारी उदासी
समझ पाते
और कभी मुस्कान
चेहरे पर
हंसी से पहले
देख पाते
घर पर
उदासी से दूर
सबके बीच
तुमको पाते
बारिश से पहले
आकाश से
फूल बरसाते

____________//__________

रामप्यारी का गांव

हम उसी को
पास अपने पास
बुलाते हैं
रात में
सितारों को देखकर
जो मुसकुराते हैं
सुबह में
अपने घर
सब बादल को
बुलाते हैं
याद आएगी
हर पहर
तुमसे गुफ्तगू
हमारी
वो कैसी बातें
कहीं जग न जायें
फिर बेचैनियां
सारी
याद आये
रामप्यारी का गांव
पानी में डूबे
धान के हरे भरे खेत
यह सपनों का
सावन
हवा का झोंका
कहां से आया
नदी के किनारे
उसने मुझे बुलाया
चांद को
गीत गाकर
तुमने सुनाया
आगे का रास्ता
नदी ने दिखाया
उसकी धारा का
कलकल बहता
मीठा स्वर
दुपहरी में गूंज रहा
सागर की लहरों से
धरती भीग गयी

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *