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साहित्य, संस्कृति, कला

साहित्य में अभिव्यक्ति के संदर्भ: भारत में फैज के नज़्म हम देखेंगे को किया जा रहा गलत सन्दर्भ में उपयोग

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May 20, 2023
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चिंतन

 

पाकिस्तान का इतिहास अजीब दुविधा से घिरा रहा और विद्वानों के अनुसार भारतीय भूभाग के इस्लामीकरण से यह देश अस्तित्व में आया और स्थापना के बाद अमरीका की मदद और समर्थन से यह देश अपने अस्तित्व को कायम रखने में सफल रहा है।

आलेख:-राजीव कुमार झा

(पत्रकार साहित्यकार और विश्लेषक)

 

सा हित्य संस्कृति के संदर्भ भी लोगों में गलतफहमियां पैदा करते हैं। पाकिस्तान के शायर फैज ने वहां फौजी हुकूमत के विरुद्ध ‘ हम देखेंगे ‘ शीर्षक से जो नज़्म लिखी आज भारत में उसका इस्तेमाल यहां सरकार के खिलाफ मुसलमानों की भावनाओं को लोगों की भावना बताकर किया जा रहा है और डीवाईएफ के पटना अधिवेशन 2023 में इसे अधिवेशन गीत के रूप में गाया गया ।

इसमें नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव भी उपस्थित थे लेकिन इन लोगों ने इस तरह का गीत गाने से आयोजकों को मना नहीं किया।फैज ने पाकिस्तान में हिन्दुओं के जीवन के दुख दर्द को लेकर क्या लिखा मुझे नहीं मालूम और मुझे यह भी नहीं पता कि पाकिस्तान के हिंदू वहां कौन सा गीत गाते हैं।

वहां हिंदी और संस्कृत पढ़ने की क्या व्यवस्था है। लोकतंत्र में शासन के जोर ज़ुल्म को लेकर इस नज़्म के इस्तेमाल से कई कमियां दृष्टिगोचर होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि पाकिस्तान के तरक्की पसंद लोग सिर्फ अपनी कौम की बातें सोचते हैं। भारत के मुसलमान अपना गीत गाएं। फैज ने पाकिस्तान निर्माण के आंदोलन में भाग लिया था या नहीं यह कहना कठिन है और इस बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन काफी मुसलमान बुद्धिजीवी वहां के लोकतंत्र को मुसलमानों के लोकतंत्र के रूप में देखकर उससे किसी तरह का विरोध रखे बिना फौजी हुकूमत जब वहां आयी तो उसके वे विरोध में उठ खड़े हुए और ऐसे इन पाकिस्तानी बुद्धिजीवियों का अपने लोकतंत्र से कोई विरोध  कभी प्रकट नहीं हुआ। पाकिस्तान का इतिहास अजीब दुविधा से घिरा रहा और विद्वानों के अनुसार भारतीय भूभाग के इस्लामीकरण से यह देश अस्तित्व में आया और स्थापना के बाद अमरीका की मदद और समर्थन से यह देश अपने अस्तित्व को कायम रखने में सफल रहा है।

इसके चक्कर में गांधी जी को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। भारतीय सेना ने कई बार पाकिस्तानी फौज को
हराया लेकिन इस देश पर कब्जा नहीं किया। भारतीय मुसलमान भारत को अपना देश मानते हैं।

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