• Wed. Feb 4th, 2026
साहित्य, संस्कृति, कला

Month: September 2025

  • Home
  • किताबों के जंगल में एक खिड़की

किताबों के जंगल में एक खिड़की

हिंदी की दुनिया— जहाँ एक बूढ़ा कवि हाथ जोड़े खड़ा है मुख्यमंत्री के सिंहासन पर बैठे फ़ासीवादी पुरोहित के आगे। तीस लाख का चेक, छत्तीसगढ़ की मिट्टी से रिसता रक्त,…

कविता: मां दुर्गा के दर पर बचपन की यादें॔ ॔॔

बहुत याद आता है, 80 के दशक का वो गांव।। वह मासूमियत भरा बचपन, दुर्गा मां के प्रांगण व पीपल का छांव ।। विद्यालय के सखियों के साथ घूमने, खेलने…

संस्मरण : मेरी यादों में-दुर्गापूजा

डॉ उर्मिला सिन्हा ब रसात में निरन्तर पानी का बरसना । घर के आस-पास, ताल-तलैया,नाहर-पोखर यहां तक कि फुलवारी के अगल-बगल भी पानी ही पानी। बीच में पगडंडी रास्ता सूझता…

फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ पर धानुक समाज को क्यों गर्व होना चाहिए…?

प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु (फनिन्द्र नाथ मंडल) केवल एक साहित्यकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के एक सजग प्रहरी थे. उनका जन्म एक ऐसे दौर में हुआ था, जब…

फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य में जातीय समीकरण और लैंगिक भेद का यथार्थ

रेणु की रचनाओं में गाँव की पंचायत भी एक प्रतीक है। ‘मेरीगंज’ के विभिन्न जातियों के पंच एक आसन पर बैठते हैं, यह प्रतीकात्मक रूप से सामाजिक एकता का आभास…

झारखंड की सियासत में आदिवासी बनाम कुर्मी : ‘पहचान और अधिकार’ की नई जंग

क्या यह आंदोलन आदिवासी बनाम कुर्मी संघर्ष का रूप लेगा? वर्तमान हालात संकेत दे रहे हैं कि दोनों समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर…

मछलियों!  तुम्हें जीना सीखना होगा

बलवान सिंह कुंडू ‘सावी’ मछलियों तुम हर जगह मारी जाओगी तालाब, झील, पोखर, अब्धि में बहते निर्जर, नदी में असीमित विस्तृत खाड़ी, वारिधि में जहाँ तुम इकट्ठी होंगी फेंका जाएगा…

॓ ॓ मेरे हमसफर ॔ ॔

कविता ॓ ॓ मेरे हमसफर ॔ ॔ – नुसरत प्रवीण मेरे जीने का, अंदाज़ हो तुम, बेपनाह मोहब्बत की आगाज़ हो तुम।। जो बीत गई सो, बात गई, मेरे जीवन…

डॉ. शिवनन्दन सिन्हा की तीन कविताएं 

डॉ. शिवनन्दन सिन्हा की तीन कविताएं परिचय आर० एस० मोर कॉलेज में लेक्चरर हिन्दी के रूप में नौकरी प्रारम्भ कर विनोवा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग ( झारखंड ) से विभागाध्यक्ष, हिन्दी…