साहित्य संवाद:
श्वेता दुहन देशवाल वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की निवासी हैं . इनका बचपन उत्तराखंड के हल्द्वानी में व्यतीत हुआ . इनकी कविताओं में प्रेम
और श्रृंगार के भावों का सुंदर समावेश है और गहन सामाजिक सरोकारों की भी इनमें अभिव्यक्ति है . यहां प्रस्तुत है राजीव कुमार झा के साथ इनकी साहत्यिक यात्रा पर बातचीत …
प्रश्न:- आपका बाल्यकाल हल्द्वानी
में व्यतीत हुआ . यहां की स्मृतियों से जुड़ी कुछ यादगार बातों से अवगत कराएं ?
उत्तर:- मैंने अपना सारा बचपन हल्द्वानी में ही बिताया है।अपनी पढ़ाओ वहीं से प्रारंभ की और परास्नातक व बी.एड भी वहीं से किया।मुझे हल्द्वानी से विशेष लगाव है।मेरे बचपन की स्मृतियाँ,मेरे दोस्त,मेरे सहपाठी सबकी स्मृतियाँ हल्द्वानी से जुड़ी हैं।
प्रश्न:- कविता लेखन से आपका लगाव
कब कैसे कायम हुआ!अपने साहित्य सृजन के बारे में बताएं
उत्तर:- बचपन से ही साहित्य ने मुझे अपनी ओर आकृष्ट किया है।स्कूल ,कॉलेज में भी मैं स्वरचित कविता प्रतियोगिता में भाग लेती थी और जीतती भी थी।पर सब एक डायरी तक सीमित था मेरे पति ने मुझे पुस्तक प्रकाशित करने का सुझाव दिया और 2021में मेरा कविता संग्रह “एक प्रयास” प्रकाशित हुआ और 8 साझा संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं।अभी मैं कई साहित्यिक मंचों से जुड़ी हूँ और अक्टूबर माह में मेरा एक और काव्य संग्रह जो श्रृंगार रस पर है “प्रेम रंग , भाग – 1″प्रकाशित होगा।
प्रश्न:- आज लेखन की ओर समाज में लोगों के बीच काफी रुझान कायम हुआ है . आज के साहित्यिक परिवेश के बारे में आप अपने विचारों से अवगत
कराएं ?
उत्तर:- आज की पीढ़ी साहित्य में रुचि ले रही है।हिन्दी साहित्य की तरफ लगाव रखती है और हिन्दी के उत्थान के लिए भी कार्य कर रही है,यह काबिले तारीफ है।युवा ही तो देश की आवाज है देश का भविष्य है।

प्रश्न:-आपने जिन लेखकों कवियों कोपढ़ा है , उनके बारे में बताएं ?
उत्तर: महादेवी वर्मा,रामधारी सिंह दिनकर,हरिवंश राय बच्चन,बाबा नागार्जुन आदि साहित्यकारों को पढ़ा है।महादेवी जी ने मुझे बहुत प्रेरित किया है।मुझे कुमार विश्वास जी को पढ़ना और सुनना भी बहुत पसंद है।
प्रश्न:- सोशल मीडिया पर कविता से संबंधित कार्यक्रम खूब लोकप्रिय हो रहे हैं , इसके बारे में आपका
क्या विचार है?
उत्तर:- एक नया प्लेटफॉर्म नवाकुंरों को मिला है सोशल मीडिया।आज कई साहित्यिक ग्रुप हैं जो आनलाइन ओपन माइक व गोष्ठियाँ आयोजित करते हैं।एक कलाकार जो मंच को तरसता था आज सोशल मीडिया ने बहुत सरल कर दिया है।
प्रश्न:- आप अपने घर परिवार के बारे में बताएं
उत्तर:- मैं जाट परिवार की कन्या हूँ जहाँ लड़कियों को बंदिशों में रखा जाता है।हम तीन बहनें और एक भाई हैं।मैं सबसे बड़ी हूँ।और बड़े बच्चे को आदर्श रूप में देखा जाता है हमारे समाज में।2009 में मेरी शादी हुई मेरे पति बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट हैं।मैं मुरादाबाद की रहने वाली हूँ।अभी मेरी फैमिली में मैं,मेरा पति और दो प्यारे से बच्चे हैं।
प्रश्न:- लेखन के अलावा आपकी अभिरुचि और किन कार्यों में है?
उत्तर:- ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करना,कला,पुस्तक पढ़ना,संगीत,मित्र बनाना और मंच संचालन।
प्रश्न:- आप प्रधानाध्यापिका हैं . देश की उन्नति के संदर्भ में समाज में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालें ?
उत्तर:- जिस देश के नागरिक शिक्षित होते हैं वह देश हमाशा उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है।एक प्रधानाध्यापिका होने के नाते मुझे अगर कोई अशिक्षित दिखता है तो मैं उसे शिक्षा का महत्व बताती हूँ और पढ़ने के लिए प्रेरित करती हूँ।
प्रश्न:- शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त विषमता
लोकतंत्र के आदर्शों के समक्ष चुनौती प्रस्तुत करती है . इस बारे में अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत कराएं ?
उत्तर:- लोकतंत्र की सफलता सुयोग, सच्चरित्र तथा सुशिक्षित नागरिकों पर निर्भर करती है।एक शिक्षित नागरिक ही लोकतंत्र सफल बना सकता है।शिक्षा में नई नई पहल हो रही है।शिक्षा की अलख जगाने को नए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।परन्तु गुरु शिष्य का जो रिश्ता था वह अब नहीं रहा।भयमुक्त वातावरण ने पवित्र रिश्ते को तार तार कर दिया है।

प्रश्न:- मुरादाबाद शहर और यहां साहित्य कला की परंपरा के बारे में जानकारी दीजिए ?
उत्तर:- मुरादाबाद उत्तर प्रदेश का एक ऐसा शहर है जो पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है।पीतल के बर्तन में पारम्परिक फूलदान,गणेश,लाफिंग बुद्धा,स्टूल,ट्रे आदि प्रकार के बर्तन के लिए प्रसिद्ध है।नटराज पीतल के बर्तन में सबसे सुंदर वस्तु है जो उपहार में भी खूब दिया जाता है।