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संस्मरण : मिट्टी से दूर, आत्मा के पास

गांव की संस्कृति से दूर, शहर की भीड़ में खो जाने की पीड़ा – यह सिर्फ मेरी नहीं, लाखों युवाओं की व्यथा है। सोचता हूं – क्या किसी दिन ऐसा…

विनोद आनंद की कहानी :- विक्टोरिया पार्क की वह बेंच

लेखक परिचय :- विनोद आनंद (विनोद कुमार मंडल) जन्म 10 जनवरी, 1965 शिक्षा:-स्नातकोत्तर(हिंदी), रांची विश्व विद्यालय, पिछले चार दशक से साहित्य औऱ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय, साहित्य के विभिन्न…

स्मृतियों में बसा ‘डाक चाचा’:खाकी वर्दी वाला देवदूत

“डाकिया” शब्द कानों में पड़ते ही, आज से कुछ वर्ष पहले का वह शांत, किंतु जीवंत दृश्य मानस पटल पर साकार हो उठता है। आँखों के समक्ष खाकी का वह…

कविता :-मिट्टी का घरौंदा

दीपावली पर विशेष मिट्टी का घरौंदा कवयित्री :- नुसरत प्रवीण बहुत याद आता है , वह मिट्टी का घरौंदा , वह बचपन की दिवाली , पटाखे ,फुलझड़ियां व वेली का…

दीपावली पर विशेष: अब मिट्टी के घरौंदे नजर नहीं आते

मैं छोटे-छोटे फूल चुन चुन कर बाउंड्री पर लगाती, कभी आम के पत्ते तो कभी गेंदा के गुछे। घरौंदे के द्वार पर तिनकों और रंगीन कागज से ‘स्वागतम्’ लिखती। सूख…

कहानी : अमर प्रेम

कहानीकार : विनोद आनंद लेखक परिचय :- विनोद आनंद (विनोद कुमार मंडल) जन्म 10 जनवरी, 1965 शिक्षा:-स्नातकोत्तर(हिंदी), रांची विश्व विद्यालय, पिछले चार दशक से साहित्य औऱ पत्रकारिता के क्षेत्र में…

किताबों के जंगल में एक खिड़की

हिंदी की दुनिया— जहाँ एक बूढ़ा कवि हाथ जोड़े खड़ा है मुख्यमंत्री के सिंहासन पर बैठे फ़ासीवादी पुरोहित के आगे। तीस लाख का चेक, छत्तीसगढ़ की मिट्टी से रिसता रक्त,…

कविता: मां दुर्गा के दर पर बचपन की यादें॔ ॔॔

बहुत याद आता है, 80 के दशक का वो गांव।। वह मासूमियत भरा बचपन, दुर्गा मां के प्रांगण व पीपल का छांव ।। विद्यालय के सखियों के साथ घूमने, खेलने…

संस्मरण : मेरी यादों में-दुर्गापूजा

डॉ उर्मिला सिन्हा ब रसात में निरन्तर पानी का बरसना । घर के आस-पास, ताल-तलैया,नाहर-पोखर यहां तक कि फुलवारी के अगल-बगल भी पानी ही पानी। बीच में पगडंडी रास्ता सूझता…

फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ पर धानुक समाज को क्यों गर्व होना चाहिए…?

प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु (फनिन्द्र नाथ मंडल) केवल एक साहित्यकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के एक सजग प्रहरी थे. उनका जन्म एक ऐसे दौर में हुआ था, जब…