राजेश्वरी बाजपेई की तीन कविताएं
सर्दियों का ठहाका *************** हाय सर्दी की यह ठंड या प्रकृति का है सभी को दंड? हंसी-खुशी प्यार से सब इसे कहते “गुलाबी ठंड” थोड़ी रहम का बने यदि मापदंड…
संस्मरण : मिट्टी से दूर, आत्मा के पास
गांव की संस्कृति से दूर, शहर की भीड़ में खो जाने की पीड़ा – यह सिर्फ मेरी नहीं, लाखों युवाओं की व्यथा है। सोचता हूं – क्या किसी दिन ऐसा…
किताबों के जंगल में एक खिड़की
हिंदी की दुनिया— जहाँ एक बूढ़ा कवि हाथ जोड़े खड़ा है मुख्यमंत्री के सिंहासन पर बैठे फ़ासीवादी पुरोहित के आगे। तीस लाख का चेक, छत्तीसगढ़ की मिट्टी से रिसता रक्त,…
रेखाओं में जीवन, रंगों में समाज: सुभाष शर्मा की कला-यात्रा
सुभाष शर्मा के लिए कला केवल रंगों का खेल नहीं रही, बल्कि जीवन को समझने और महसूस करने का एक गहरा माध्यम बन गई। जिस सूक्ष्मता और संवेदनशीलता से वे…
प्रसिद्ध कथाकार मार्केंडेय की धर्मपत्नी विधावती को जानिये,जो मार्केंडेय के जीवन संगनी हीं नही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी
हिंदी के प्रख्यात कथाकार और “कथा” पत्रिका के संपादक जनवादी लेखक संघ के संस्थापकों में से एक मार्कण्डेय की पत्नी के बारे में। उनकी डॉक्टर बेटी स्वास्ति ठाकुर ने अपनी…
भारतीय शास्त्र और ज्ञान परंपरा के प्रसार में नारी के अवदान का सरस विवेचन !
पुस्तक समीक्षा ज्ञान शिरोमणि विद्योतमा ( खंड काव्य ) कवयित्री: रजनी सिंह प्रकाशक : रजनी प्रकाशन रजनी विला, डिबाई पिन 203393 जिला: बुलंदशहर उत्तर प्रदेश मोबाइल+919412653980 भारतीय शास्त्र और ज्ञान…
देवप्रिया की अज़ीब दास्तान
सुप्रसिद्ध हिंदी कवि, कला एवम फ़िल्म समीक्षक तथा उपन्यासकार विनोद भारद्वाज की पत्नी देवप्रिया जी के बारे में जो कैंसर से लड़ते हुए इस दुनिया से विदा हो गयीं। विनोद…
हस्का का फैसला
(अफ़ग़ान कहानी)राना जुरमतेपश्तो से अंग्रेजी अनुवाद : शकीबा हबीबहिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह सुबह का सूरज उदय होने को था। हस्का तंदूर के पास एक बर्तन में गुंथा हुआ आटा…