पुस्तक : शृङ्गार रस
साझा काव्य संकलन
सम्पादक : ऋषभ विश्वकर्मा
प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन
शिवोहम प्रकाशन की इस कृति की एक रसात्मक साहित्यिक मीमांसा
भा रतीय काव्य परंपरा में “शृङ्गार रस” को रसों का राजा कहा गया है—यह प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण और भावनात्मक निकटता का प्रतीक है। “शृङ्गार रस” शीर्षक से प्रकाशित यह साझा काव्य संकलन उसी मधुर और गहन अनुभूति को शब्दों में पिरोने का एक सुंदर प्रयास है।
शिवोहम प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और संपादक ऋषभ विश्वकर्मा जी के सुसंयोजित संपादन में सजी यह कृति विविध रचनाकारों के भावों का ऐसा संगम है, जिसमें प्रेम के अनेक रूप—मिलन और विरह, आकर्षण और प्रतीक्षा, सौंदर्य और समर्पण—सजीव हो उठते हैं।
प्रेम का व्यापक स्वरूप: मिलन से विरह तक
इस संकलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रेम को एकांगी नहीं, बल्कि बहुआयामी रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कहीं मिलन की मधुरता है, तो कहीं विरह की पीड़ा; कहीं पहली दृष्टि का आकर्षण है, तो कहीं वर्षों के संबंधों की गहराई। रचनाकारों ने इन भावों को इस प्रकार उकेरा है कि पाठक स्वयं को उन अनुभूतियों के बीच पाता है।
सौंदर्य और भावनाओं का संतुलन
“शृङ्गार रस” में केवल बाह्य सौंदर्य का वर्णन नहीं, बल्कि आंतरिक भावनाओं की सुंदरता भी झलकती है। यह कृति यह दर्शाती है कि सच्चा शृंगार केवल रूप में नहीं, बल्कि भाव, व्यवहार और संवेदनाओं में निहित होता है।
भाषा और काव्यात्मकता
इस संकलन की भाषा कोमल, लयात्मक और अत्यंत भावपूर्ण है। शब्दों में एक संगीतात्मकता है, जो पाठक को कविता की धारा में बहा ले जाती है।
कविताओं में छंद, अलंकार और भावों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जो इस कृति को एक सशक्त काव्य अनुभव प्रदान करता है।
संपादन की विशेषता
ऋषभ विश्वकर्मा जी का संपादन इस संकलन को एक सुसंगत और प्रवाहमयी रूप देता है। विभिन्न कवियों की रचनाओं को इस प्रकार संयोजित किया गया है कि पूरी पुस्तक एक सतत भावधारा के रूप में प्रस्तुत होती है।
समकालीन संवेदनाओं का स्पर्श
यह कृति पारंपरिक शृंगार के साथ-साथ आधुनिक प्रेम की अनुभूतियों को भी समेटे हुए है। इसमें आज के समय के संबंधों की जटिलता, भावनात्मक गहराई और बदलते नजरिए को भी स्थान मिला है।
एक मधुर और संग्रहणीय कृति
शिवोहम प्रकाशन (कोलकाता/हैदराबाद) द्वारा प्रकाशित “शृङ्गार रस” हर उस पाठक के लिए विशेष है, जो प्रेम और काव्य की दुनिया में डूबना चाहता है।
अंततः, यह संकलन प्रेम के उन कोमल स्पर्शों का सुंदर प्रतिबिंब है, जो जीवन को अर्थ, सौंदर्य और मधुरता प्रदान करते हैं। “शृङ्गार रस” वास्तव में भावनाओं का एक ऐसा उत्सव है, जो पाठक के हृदय में लंबे समय तक अपनी सुगंध बिखेरता रहता है।
शिवोहम प्रकाशन
कोलकाता / हैदराबाद
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