मिथकीय पुनर्पाठ और स्त्री-चेतना का नया आकाश: ‘विषकन्या का प्रेम’ एवं ‘शकुंतला की मातृ-चेतना’ का आलोचनात्मक मूल्यांकन
उपन्यास का सबसे सशक्त, कलात्मक और प्रभावशाली पक्ष इसकी भाषा-शैली और इसकी गहन प्रतीक योजना में निहित है। लेखक विनोद आनंद की लेखनी में काव्यात्मकता के सुकोमल सौंदर्य और दार्शनिकता…
लोक नाट्य से शोध की गहराई तक: डॉ. चन्द्रसखी का सांस्कृतिक अवदान
डॉ. बीरेन्द्र कुमार ‘चन्द्रसखी’ मैनपुरी की माटी और धानुक समाज के गौरव हैं। किसान परिवार से पी-एच.डी. तक का उनका संघर्ष प्रेरणादायी है। उन्होंने काव्य और शोध के माध्यम से…
विष्कन्या का प्रेम : विष से विदेह तक: विनोद आनंद के उपन्यासों में मिथक, संवेदना और नवीन दृष्टि का अनुशीलन
विनोद आनंद की साहित्यिक प्रतिभा की सराहना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि उन्होंने पत्रकारिता की वस्तुनिष्ठता और साहित्य की भावुकता का एक दुर्लभ संतुलन साधा है। वे न केवल एक…