पुष्प पैलेस के सभागार में ‘साहित्य विमर्श’ के तत्वावधान में आयोजित ‘साहित्यिक गोष्ठी सह कवि सम्मेलन’ ने शब्दों की जादूगरी से एक अमिट छाप छोड़ी। माँ शारदे की वंदना और सुरमयी संगीत के बीच सजी इस महफ़िल ने जिले के मनीषी रचनाकारों को एक मंच पर ला खड़ा किया।
संस्थापक अध्यक्ष रामचंद्र मिश्र की गरिमामयी अध्यक्षता और ‘अंतर्कथा’ न्यूज़ के संपादक विनोद आनंद की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति ने कार्यक्रम की बौद्धिक गहराई को विस्तार दिया। जहाँ वाणी वंदना के स्वर माँ सरस्वती के आशीष की भाँति गूँजे, वहीं जयंत चक्रपाणि, प्रवीणा कुमारी शीला पात्रो और संध्या रानी जैसे कलमकारों की ओजस्वी व संवेनदशील रचनाओं ने मानवीय संवेदनाओं को झंकृत कर दिया। यह आयोजन केवल कविताओं का पाठ मात्र नहीं, बल्कि समसामयिक सरोकारों और साहित्यिक मूल्यों के प्रति एक जीवंत प्रतिबद्धता बनकर उभरा, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।

रिपोर्ट :-संजय चौहान
ध नबाद की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘साहित्य विमर्श’ के तत्वावधान में हीरक रोड स्थित पुष्प पैलेस होटल के सभागार में एक भव्य साहित्यिक गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के प्रख्यात रचनाकारों और साहित्यकारों ने अपनी कालजयी कविताओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक अध्यक्ष सह संयोजक रामचंद्र मिश्र ने की, जिन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत में सभी आगत अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने उपस्थित साहित्यकारों को गुलाब का फूल भेंट कर उनका सप्रेम अभिनंदन किया और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
समारोह का विधिवत शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। श्रीमती वाणी वंदना ने अपनी सुरीली आवाज में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को भक्तिमय और संगीतमय बना दिया। उनकी मधुर प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर दिया।वहीं प्रवीण कुमारी की मधुर स्वर से कार्यक्रम में चार चांद लग गया.

इस गौरवशाली कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ‘अंतर्कथा’ न्यूज़ के संपादक विनोद आनंद उपस्थित रहे, जिन्होंने साहित्य के सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी संचालन श्रीमती संध्या रानी ने किया, जबकि संजीव कुमार ने स्वागत भाषण के जरिए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। अंत में श्रीमती वाणी वंदना ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

काव्य पाठ के सत्र में एक से बढ़कर एक रचनाओं का पाठ किया गया, जिसने पूरे कार्यक्रम को बेहद रोचक और ऊर्जावान बना दिया। मंच से जयंत चक्रपाणि ने अपनी ओजस्वी शैली में कविताएं पढ़ीं, तो वहीं कवयित्री शीला पात्रो और विनीता झा की रचनाओं ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया। संध्या रानी और प्रवीण कुमारी ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से समसामयिक विषयों पर प्रकाश डाला। ज्योति कुजूर, रामचंद्र मिश्र, कमलदेव मंडल और अवनीकांत झा के कविता पाठ ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में प्रदीप मिश्र, शिव कुमार राय, संजीव कुमार और विनोद आनंद ने अपनी सशक्त लेखनी और प्रभावी प्रस्तुति से गोष्ठी में चार चांद लगा दिए।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है, बल्कि समाज में सकारात्मक वैचारिक परिवर्तन भी आता है। पुष्प पैलेस का कोना-कोना कवियों की कल्पनाओं और शब्दों की गूंज से सराबोर रहा।

साहित्य प्रेमियों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि धनबाद की कोयला नगरी में साहित्य की धारा आज भी उतनी ही वेग से प्रवाहित हो रही है। इस सफल आयोजन ने जिले के साहित्यिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, जहाँ अनुभवी दिग्गजों के साथ-साथ उभरते हुए रचनाकारों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। देर शाम तक चले इस कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।
