कविता : बिटिया
बिटिया “बधाई हो बधाई” दूर से आवाज आई। स्नेहिल आवाज, चेहरे पर खुशी लिए विमला ताई आई। माँ ने नज़रें झुका लीं, पिता के चेहरे पर थोड़ी फीकी मुस्कान आई।…
बदलते परिवेश में संबंध, अपेक्षाएँ और स्त्री की भूमिका
“परिवर्तन ही जीवन का शाश्वत नियम है; जो केवल अतीत या वर्तमान में उलझे रहते हैं, वे निश्चित ही अपने भविष्य को खो देते हैं।” बदलते परिवेश में संबंध, अपेक्षाएँ…