बिटिया
“बधाई हो बधाई”
दूर से आवाज आई।
स्नेहिल आवाज,
चेहरे पर खुशी लिए
विमला ताई आई।
माँ ने नज़रें झुका लीं,
पिता के चेहरे पर
थोड़ी फीकी मुस्कान आई।
बगल में खड़ी बुआ
ने बुरा सा मुँह बनाया—
“ये कैसी बधाई?
ताई, फिर से बिटिया है आई!”
सुन-अनसुना कर
ताई ने गोद में उठाया,
माँ हौले से मुस्काई।
देख खिलखिलाती ताई
कहा— “लक्ष्मी है घर आई,
बधाई हो बधाई।”
माँ की आँखें भर आईं,
सोच थोड़ी विस्तृत हुई—
पढ़ाऊँगी, लिखाऊँगी,
एक दिन अच्छे घर ब्याहूँगी।
मिलेगा जीवन साथी सच्चा,
पग-पग साथ मिलेगा अच्छा।
आज रोती है तू, तो क्या?
कल हँसेगी, कुछ न सहेगी।
पढ़कर-लिखकर नाम करेगी।
इतना
पूजा प्रियदर्शिनी